Polytechnic First Year Memories – जब Electronics Sir ने पूछा "Voltage Female होता है या Male?"
जब सर ने पूछा – "वोल्टेज मेल होता है या फीमेल?"
ये किस्सा है उस वक़्त का जब मैंने पॉलिटेक्निक में पहला साल शुरू किया था। स्कूल से कॉलेज का सफर ही अपने आप में एक बड़ा बदलाव होता है। और जब आप सीधे टेक्निकल फील्ड में कदम रखते हैं, तो हर चीज़ थोड़ी confusing लगती है। मैं हाई स्कूल पास करके सीधी पॉलिटेक्निक करने आई थी – मन में एक अलग ही उत्साह था, लेकिन साथ में एक अनजाना डर भी।
कॉलेज शुरू हुए कुछ ही दिन हुए थे – कोई 12-14 दिन। हम सब धीरे-धीरे नए माहौल में घुलने की कोशिश कर रहे थे। तभी एक दिन हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स के सर क्लास में आए और बोले:
"जिन्होंने सिर्फ हाई स्कूल पास करके एडमिशन लिया है, सब खड़े हो जाओ!"
हम थोड़े घबराए, फिर धीरे-धीरे खड़े हो गए। सोच रहे थे कि अब क्या होने वाला है? फिर सर ने मुस्कुराते हुए पूछा:
"बताो, वोल्टेज मेल होता है या फीमेल?"
पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। हम सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे, कुछ तो हँसी रोकने की कोशिश कर रहे थे, और कुछ की आँखों में सवाल तैर रहे थे। हमें तो समझ ही नहीं आया कि सर ये क्या पूछ रहे हैं!
फिर उन्होंने दूसरा सवाल दागा:
"वोल्टमीटर का रेसिस्टेंस सीरीज में होता है या पैरेलल में? और अमीटर का?"
उस वक़्त तो ऐसा लगा जैसे टेक्निकल पढ़ाई की गाड़ी चल पड़ी है, पर हम बिना सीट बेल्ट के बैठे हैं! लेकिन उसी पल ये भी समझ आया कि अब असली पढ़ाई शुरू हो गई है। धीरे-धीरे सब समझ में आने लगा – कि वोल्टमीटर हमेशा पैरेलल में जोड़ा जाता है, क्योंकि ये potential difference मापता है। और अमीटर को सीरीज में जोड़ा जाता है, क्योंकि ये current मापता है।
और जहाँ तक वोल्टेज मेल या फीमेल की बात है – तो वो तो सर का अंदाज़ था हमें समझाने का कि करंट और वोल्टेज के बीच क्या रिश्ता होता है। कुछ लोग मज़ाक में कहते हैं, वोल्टेज फीमेल है क्योंकि ये पुश करती है, और करंट मेल है क्योंकि ये फ्लो करता है।
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आज जब वो पल याद आता है...
तो हँसी भी आती है और वो मासूमियत भी याद आती है, जब कुछ नहीं समझ आता था लेकिन सीखने का जुनून ज़रूर था। वही अनुभव आज हमें मज़बूत बनाते हैं।
क्या आपके साथ भी कॉलेज के शुरुआती दिनों में कोई ऐसा दिलचस्प या मज़ेदार वाकया हुआ है?
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