बचपन की बारिश और आज का सूखा – बदलता मौसम, बदलती यादें

🌧️ बचपन की बारिश और आज का सूखा — एक भावुक सफर

लेखिका: मोनिका मिश्रा

मुझे बचपन से ही बारिश बेहद पसंद है। जब मैं बहुत छोटी थी और गाँव में बारिश होती, तो मैं छप्पर के किनारे खड़ी होकर अपनी छोटी-छोटी हथेलियों में बारिश की बूँदों को भरने की कोशिश करती थी। कुछ बूँदें सिर पर ले लेती थी और घंटों उन्हें निहारती रहती थी।

हाथों से फिसलता पानी और आँखों से बरसती खुशी — यही था मेरा बरसात का समय।

आज जब मैं रांची में हूँ और यहाँ तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है, तब वही बचपन वाली बारिश फिर से आँखों के सामने घूम गई। आज तो रेड अलर्ट भी है और बच्चों का स्कूल भी बंद है।

25–30 साल पहले की बारिश याद आती है — जब चार-पाँच दिन तक लगातार पानी बरसता, खेतों में, पोखरों में, नालों में, गड्ढों में तक पानी भर जाता। हर जगह हरियाली ही हरियाली दिखाई देती। नीम और आम के पत्तों से टपकती बूँदें, मिट्टी की सोंधी खुशबू... वो सब अब जैसे सपना लगने लगा है।

😢 लेकिन अब सब कुछ बदल गया है

मैं उत्तर प्रदेश के गाँव से आती हूँ और वहाँ अब वैसी बारिश नहीं होती। न कुएँ भरते हैं, न पोखरे, न नहरों में पानी होता है। पहले धान के लिए अलग से पानी डालने की जरूरत ही नहीं थी, अब बिना पानी के धान रोपना असंभव हो गया है।

ये सब देखकर दिल दुखता है। क्या हमने पर्यावरण को इतना बदल दिया है कि अब वो हमें वैसी बारिशें भी नहीं दे पा रहा?

🌱 अब भी उम्मीद बाकी है...

अगर हम फिर से देशी पेड़ लगाएँ — जैसे गूलर, चिबिल, आम, नीम — तो शायद मौसम फिर से हमारा साथ दे। मिट्टी फिर से जीवंत हो, हवा शुद्ध हो और बच्चे भी वैसी ही बारिश देख सकें जैसी हमने देखी थी।

रांची में बारिश हो रही है, लेकिन यूपी आज भी प्यासी है।

सोचिए… क्या हम प्रकृति को फिर से वो प्यार दे सकते हैं जिसकी उसे ज़रूरत है?


📌 एक सवाल हम सबके लिए:

क्या हम अपने बच्चों को वो बचपन लौटा सकते हैं जो हमने जिया?
अगर हाँ — तो शुरुआत हमसे ही होगी। एक पेड़ से। एक सोच से।

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📌 एक सवाल हम सबके लिए:

क्या हम अपने बच्चों को वो बचपन लौटा सकते हैं जो हमने जिया?
अगर हाँ — तो शुरुआत हमसे ही होगी। एक पेड़ से। एक सोच से।

और हाँ, ये हाल सिर्फ उत्तर प्रदेश या बिहार का नहीं है। ये चिंता पूरे देश की है। जहां एक समय मानसून में झूम कर बारिश हुआ करती थी, वहां अब बस कुछ घंटों की हल्की फुहारें होती हैं।

मुझे यकीन है कि रांची की बारिश भी अब पहले जैसी नहीं रही होगी। आप क्या सोचते हैं? क्या आप मुझसे सहमत हैं?

तो आइए... अपनी यादें, अपनी बातें इस पोस्ट के comment section में ज़रूर लिखें।
शायद आपकी भी कोई बचपन की बारिश अब भी दिल में टपक रही हो…

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