“Pita aur Beti ki Marmik Kar Dene Wali Kahani”

कहानी: "मेहंदी का रंग और रिश्तों की सच्चाई"
लेखिका: Apni Pehchaan

घर में आज रौशनी की मेहंदी थी। चारों तरफ सखियाँ हँसी-मज़ाक कर रही थीं, महफ़िल गुलज़ार थी। रौशनी भी बहुत खुश थी — आँखों में सपने, हाथों में मेहंदी और दिल में अपने प्यार राहुल के साथ एक सुनहरा कल बसाया हुआ था।

एक सखी ने मुस्कुराते हुए कहा,
"तेरी मेहंदी का रंग बहुत गहरा चढ़ेगा, सुना है जिस इंसान का प्यार सच्चा होता है, उसका असर मेहंदी में दिखता है।"

दूसरी सखी ने मज़ाक में कहा,
"अब वो तेरा वाला नहीं, हमारे जीजाजी हैं!"
सभी सखियाँ ठहाके लगाकर हँसने लगीं।

तभी रौशनी के मोबाइल पर कॉल आया।
एक सखी ने हँसते हुए कहा,
"लो जीजाजी का फ़ोन! चलो देखते हैं क्या कहते हैं!"
फोन स्पीकर पर लगाया गया।

रौशनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "हेलो राहुल!"
पर जो आवाज़ उधर से आई, उसने जैसे समय रोक दिया।

"रौशनी... मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता।"

पूरा कमरा एक पल को शांत हो गया। जैसे सबने कुछ अनहोनी सुनी हो। रौशनी की मुस्कान एक झटके में गायब हो गई।

"क्या... क्या कहा आपने?" रौशनी की काँपती हुई आवाज़ में सवाल था।

राहुल बोला,
"तुम्हारे मम्मी-पापा आज मेरे घर आए थे। मेरे डैडी ने कहा कि हमें शादी में Thar चाहिए। लेकिन तुम्हारे पापा ने साफ मना कर दिया। कहने लगे कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं। यार, हम तो समझते थे कि तुम्हारे पापा तुमसे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन जब इतनी सी बात भी नहीं कर सकते तो क्या फायदा? और अगर उनके पास औकात नहीं थी तो इतने बड़े-बड़े सपने क्यों दिखाए?"

रौशनी सन्न रह गई। आँखों में आंसू थे लेकिन आवाज़ में अब भी संयम था।

"पापा... अभी वहीं हैं क्या?"
"नहीं, वो अभी-अभी गए हैं।"

रौशनी ने बिना कुछ कहे फोन काट दिया और घबराकर अपने पापा को कॉल करने लगी। दो-तीन बार बेल गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिर अचानक कॉल लग गई।

पापा की थकी हुई और टूटी आवाज़ आई —
"हैलो, रौशनी बेटा..."

"पापा... आप कहाँ हैं? जल्दी घर आइए।"
"बेटा, हम बस पहुँचने वाले हैं।"

कुछ देर बाद माँ-पापा घर लौटे। घर में चुप्पी थी लेकिन सबकुछ समझ आ चुका था — स्पीकर पर हुई बात से सब जान चुके थे कि राहुल ने रिश्ता क्यों तोड़ा।

रौशनी के चाचा जी ने कहा,
"आप लोग इतना टेंशन क्यों ले रहे हैं? रौशनी मेरी भी बेटी है। एक Thar की बात है, मैं पैसे दे दूँगा।"

रमेश जी — रौशनी के पिता — ने नम आँखों से कहा,
"मैं इतना भी गया-गुजरा नहीं हूँ कि अपनी बेटी को कार ना दे सकूं। मैंने बस थोड़ी मोहलत माँगी थी... सोचा शादी के बाद दे दूँगा। लेकिन उन्होंने जिस तरह बात की, वो समझ से बाहर है। क्या सच में अच्छे घरों के लोग ऐसे बोलते हैं?"

रौशनी सब कुछ सुन रही थी। उसकी आँखों के सामने पिछले दो साल घूम गए — जब कॉलेज में राहुल से दोस्ती हुई, धीरे-धीरे प्यार और फिर बिना किसी रुकावट के शादी की तैयारियाँ।

लेकिन आज जो राहुल ने बोला... और जैसे उसके पापा की बेइज्जती की — रौशनी सब समझ गई थी।

कुछ देर बाद, रौशनी ने अपने पापा की आँखों में देखते हुए कहा,
"पापा, मैं राहुल से शादी नहीं कर सकती।"

रमेश जी चौंक गए।
"बेटा, तुम चिंता मत करो। तुम्हारा बाप जिंदा है, जब तक मैं हूँ, तुम्हारी शादी नहीं टूटेगी।"

रौशनी ने दृढ़ आवाज़ में कहा —
"नहीं पापा, ये रिश्ता मैं खुद तोड़ रही हूँ। दो साल से जिसे मैं जानती थी, अगर वही लड़का मेरे माँ-पापा की इस तरह बेइज्जती कर सकता है... तो सोचिए, शादी के बाद मेरे साथ कैसा व्यवहार करेगा? मैं अपने आपको आग में नहीं झोंक सकती, और ना ही आपको किसी के आगे हाथ जोड़ने दूँगी। अगर ये रिश्ता टूट जाए तो क्या? जीवनभर पछतावे से तो अच्छा है कि अभी फैसला लिया जाए।"

रमेश जी ने नम आँखों से बेटी को देखा — आज उन्हें अपनी बेटी पर गर्व हो रहा था।

वास्तव में रमेश जी एक सफल व्यापारी थे। उनके लिए एक Thar क्या, सौ Thar भी कम ना थे। लेकिन उन्होंने जानबूझकर गाड़ी देने से मना किया था — क्योंकि उन्हें राहुल के परिवार की असलियत पहले से पता थी। वो चाहते थे कि उनकी बेटी खुद उस सच्चाई को पहचाने, और वही हुआ।

कुछ महीनों बाद, उसी तारीख को रौशनी की शादी रमेश जी के एक पुराने मित्र के बेटे से हुई — बड़े धूमधाम से। आज रौशनी खुशहाल जीवन जी रही है, एक बेटा, एक बेटी और एक प्यार करने वाला पति... जिसने कभी उसकी माँ-बाप की इज्जत पर सवाल नहीं उठाया।


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एक सन्देश:
जो लड़कियाँ अपने माता-पिता से बगावत कर के प्यार में अंधी होकर शादी करती हैं या घर से भाग जाती हैं, उन्हें अकसर पछताना पड़ता है। माँ-बाप हमारे दुश्मन नहीं होते।
उनका हर फैसला हमारे भले के लिए होता है।
इज्जत से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता।
जो नसीब में है, वह आपको ज़रूर मिलेगा — सही समय पर और सही इंसान के साथ।


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आपकी कहानी, आपकी आवाज़ — Apni Pehchaan

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